क्या सच में खतरनाक है हंता वाइरस । जाने क्या है इसकी सच्चाई ?


जब से हंता वायरस की खबर आई है
दुनियाभर में कोरोना वायरस से ख़ौफ़ के बीच हंता वायरस ने भी लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है

चीन में हंता वायरस की वजह से 23 मार्च को एक शख्स की मौत की ख़बर है.

ग्लोबल टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, हंता वायरस से संक्रमित शख्स जिस बस में सवार था, उसमें सवार 32 लोगों की जांच की गई है.
इस ख़बर के सामने आते ही ट्विटर पर #HantaVirus टॉप ट्रेंड करने लगा.
लोगकोरोना से जारी जंग के बीच हंता को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं और डर ज़ाहिर कर रहे हैं.

लेकिन सबसे ज़रूरी सवाल ये कि आख़िर हंता वायरस फैलता कैसे है?
हंता वायरस के लक्षण?

सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, हंता वायरस चूहों से फैलता है.
अगर कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या लार को छूने के बाद अपने चेहरे पर हाथ लगाता है तो हंता संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है.

हालांकि आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता है. हंता के संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों का वक़्त लग सकता है.

अगर कोई व्यक्ति हंता संक्रमित है तो उसे बुखार, दर्द, सर्दी, बदन दर्द, उल्टी जैसी दिक़्क़तें हो सकती हैं.


हंता संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भरने और सांस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती है.


जनवरी 2019 में हंता से संक्रमित नौ लोगों की पेटागोनिया में मौत हो गई थी. इसके बाद पर्यटकों को आगाह भी किया गया था.


तब के एक अनुमान के मुताबिक़, हंता वायरस से संक्रमित लोगों के 60 मामले सामने आए थे, जिनमें 50 को क्वारंटीन रखा गया था.
CDC की मानें तो हंता वायरस में मृत्युदर 38 फ़ीसदी होती है और इस बीमारी का कोई 'स्पेसिफिक ट्रीटमेंट' नहीं है.

बचाव और इलाज
इससे बचने का फिलहाल यही तरीका है कि चूहों से दूरी बनाकर रखी जाए। खासकर चूहे के लार, थूक, मल-मूत्र से बच कर रहें।  इसका फिलहाल कोई प्रॉपर इलाज सामने नहीं आया है। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण होते ही चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है। सांस संबंधी परेशानी में आईसीयू में भर्ती करना और ऑक्सीजन थेरेपी देने से राहत हो सकती है।
भारत में कितना खतरा
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशंस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये वायरस अभी तक सिर्फ चीन और अर्जेंटीना में ही पाया गया है। चीन में भी इस वायरस से एक व्यक्ति की मौत हुई है। सीडीसी के मुताबिक चूहों के मल-मूत्र से दूर रहें तो इस वायरस का संक्रमण नहीं होगा। इसका संक्रमण व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता। इस लिहाज से भारत में अभी इसका खतरा नहीं है।

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